
इस अवसर पर ओडिशा के प्रसिद्ध दुलदूली बाजा एवं कीर्तन मंडली ने अपनी संगीतमयी प्रस्तुति से समां बांध दिया। ढोल-नगाड़ों और भजनों की गूंज से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया और श्रद्धालु थिरक उठे। कीर्तन मंडली की सजीव प्रस्तुति ने जनसमूह को भगवान के चरणों में विभोर कर दिया।रथ यात्रा भगवान श्री जगन्नाथ महाप्रभु की रथ मौसी बाड़ी से चलकर वापस श्री मंदिर पहुंची। परंपरा के अनुसार, अब दो दिन तक महाप्रभु रथ में ही विराजमान रहेंगे। इस दौरान भक्तजन रथ के दर्शन करके पुण्य लाभ अर्जित करेंगे।

6 जुलाई को भगवान का सुना वेष सौंदर्य श्रृंगार किया जाएगा, उसके पश्चात 7 जुलाई को आधार पना की रस्म निभाई जाएगी। इसके बाद 8 जुलाई को “निलाद्री बीजे” की पारंपरिक रस्म पूरी की जाएगी, जिसके साथ ही महाप्रभु जी विधिवत रूप से श्री मंदिर में पुनः प्रवेश करेंगे।रथ यात्रा के उपरांत रात्रि में मंदिर परिसर में विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें कीर्तन, भजन संध्या, सांस्कृतिक नृत्य एवं प्रवचन शामिल होंगे। इन आयोजनों में स्थानीय कलाकारों के साथ-साथ बाहर से आए भक्ति मंडलियों की भी विशेष प्रस्तुति देखने को मिलेगी।
यह पूरा आयोजन श्री जगन्नाथ मंदिर समिति, दोकड़ा के तत्वावधान में संपन्न हुआ। समिति के सदस्यगण, स्थानीय प्रशासन, पुलिस बल और स्वयंसेवकों ने रथ यात्रा को शांतिपूर्ण और भव्य रूप देने में सराहनीय भूमिका निभाई।
श्रद्धालुओं का उमड़ा जनसैलाब

दोकड़ा में आयोजित यह रथ यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक रही, बल्कि सामाजिक एकता, संस्कृति और लोक परंपराओं का भी अद्भुत उदाहरण बन गई। दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं ने भगवान श्री जगन्नाथ जी की एक झलक पाने के लिए लंबी दूरी तय की और भक्ति रस में डूबे रहे।
